काबुल: भारतीय सेना की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद आतंकी संगठन जैश-ए- मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयब्बा के अफगानिस्तान स्थित हक्कानी नेटवर्क और तालिबान से हाथ मिलाने की खबर आ रही है। खुफिया एजेंसियों की मानें तो जैश और लश्कर दोनों अपने आतंकी कैंपों को अफगानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब ले जा रहे हैं।

FATF की पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई

सूत्रों का कहना है कि फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई से बचाने के लिए आतंकी संगठन अपमे कैंपों को अफगानिस्तान में शिफ्ट कर रहे हैं। बता दें कि एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल रखा है।
फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स ने साफ कर दिया है कि आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए पाकिस्तान को जमीन पर कदम उठाने होंगे। इंडिया लगातार इस बात की कोशिश कर रहा है कि एफएटीएफ पाकिस्तान के खिलाफ पुख्ता कार्रवाई करे ताकि आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई हो

भारतीय प्रतिष्ठानों की बढ़ी सुरक्षा
आतंकी हमलों के मद्देनजर कंधार स्थित भारतीय कंसुलेट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस तरह की जानकारी तब सामने आई जब पिछले साल जलालाबाद में जैश आतंकी सेदिक अकबर की गिरफ्तारी हुई थी। सूत्रों का कहना है कि हक्कानी नेटवर्क ने 2019 के शुरुआती महीनों में मसूद अजहर को भी शरण देने की पेशकश की थी।
पेंटागन की रिपोर्ट
पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तान स्थित लश्कर को वाशिंगटन के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक लश्कर के 300 से ज्यादा आतंकी अफगानिस्तान में अमेरिका के खिलाफ एक बड़े हमले की तैयारी में जुटे हुए हैं। 2008 मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार लश्कर को अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र संघ ने ग्लोबल टेरर संगठन घोषित कर रखा है। रिपोर्ट के अफगानिस्तान में 20 से ज्यादा आतंकी संगठन सक्रिय हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण बदला ठिकाना
14 फरवरी को पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन अफगानिस्तान में तालिबान के प्रभुत्व वाले इलाकों में सुरक्षित ठिकानों पर छिपे हुए हैं।