नई दिल्ली, आर.के.मिश्रा: सारण जिले के धर्मासती गंडामन स्कूल में 16 जुलाई 2013 को मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत हो गई थी। खूब हंगामा बरपा था। सारण से लेकर पटना भाया दिल्ली तक चीख पुकार मची थी। सीएम साहब सूबे की राजधानी पटना में ही थे लेकिन एक बार भी 23 बच्चों के परिजन से मिलने नहीं गये। उस वक्त भी खामोशी की चादर ओढ़े 1 अणे मार्ग में मौन आसन्न कर रहे थे।
आज एक भी एक बार माननीय मुख्यमंत्री जी चुप हैं। ऐसा नहीं है कि मीडिया उनसे सवाल नहीं कर रहा। उनकी पार्टी के लोग भी उनके चुप्पी से असहज हैं लेकिन अभी तक प्रतिक्रिया नहीं आई है। दरअसल उन्हें पता है कि हर जख्म का इलाज वक्त कर देता है। आखिर बच्चे ही तो हैं? मर गये तो फिर हो जाएंगे। शायद इसलिए चुप हैं!
और अब तो बारिश भी दस्तक दे चुकी है।काश पहले ही अगर बरस गई होती तो आज ये दिन देखना नहीं पड़ता ।
अच्छा इस बार मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चों की मौत पर सत्तापक्ष तो चुप है ही प्रतिपक्ष भी खामोश है।दरअसल ये खामोशी कुछ नहीं, बहुत कुछ कहती है। ये शांति किसी आने वाले बड़े तुफान के संकेत हैं। तुफान से मेरा मतलब सियासी भूचाल है। कहा ये भी जा रहा है कि तेजस्वी बाबू अपने पिता लालू जी को जेल से निकलवाने के लिए कसरत कर रहे हैं। करना भी चाहिए एक पुत्र का धर्म होता है अपने पिता का साथ देना। लेकिन पिता धर्म निभाते-निभाते तेजस्वी लोकतंत्र में प्रतिपक्ष का धर्म भूल गये।
एक बात जान लीजिए जब लोकतंत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष किसी मुद्दे पर मौन हो जाए या औपचारिकता निभाने लगे तो जनता की खैर नहीं। डेढ़ सौ से ज्यादा मौतें हो चुकी है लेकिन क्या आपको कहीं बिहार में विपक्ष की भूमिका में विपक्ष दिख रहा है। तेजस्वी जी के गुमशुदगी के पोस्टर लग गये। पता नहीं कब आएंगे संविधान बचाने।
कल आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी तकरीबन एक घंटे तक लोकसभा में बोलते रहे। सबकुछ बोला लेकिन मुजफ्फरपुर मे बच्चों की मौत पर एक शब्द भी अपनी जुबान से नहीं निकाला। अब ऐसे मे अगर नीतीश जी समाज के सवालों से किनारा कर रहे हैं तो क्या गलत कर रहे हैं? ये उनका दोष नहीं। सच्चाई ये है कि सब कुर्सी का कमाल है।
जब मैने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस,पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी को पत्र लिखा तो न्यायलाय के सिवा कोई नहीं जागा। दरअसल इसे कहते है कुंभकर्णी नींद।
अब सवाल उठता है कि इस मौत के लिए कौन जिम्मेवार है? कोई तो होगा? देखते हैं सुप्रीम कोर्ट में सरकार के तरफ से क्या दलील दी जाती है।ऐसे सरकार के पास कोर्ट में अपना जवाब रखने के लिए कुछ नहीं है। वो सिर्फ इतना कहेंगे की जांच बैठा दी गयी है। देश से लेकर विदेश की टीम जांच कर चुकी है कुछ निकला नहीं है। हमने जन जागरूकता फैलाई है। इस साल ज्यादा गर्मी पड़ी है इत्यादी।
अब देखना होगा की माननीय न्यायालय इस बाल संहार के लिए किसको दोषी मानती है? क्या इस संहार के लिए स्वास्थ्य मंत्री इस्तीफा देंगे? 13 साल से सीएम की कुर्सी पर बैठे नीतीश कुमार नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए इस्तीफा देंगे? और आश्चर्य की बात तो ये रही की आज बिहार के सीएम मीडिया के सवालों से बचने के लिए अपने कार्यक्रम में मीडिया कवरेज करने की भी इजाजत नहीं दी! अब आगे देखिए कब जागते हैं हमारे देश-प्रदेश के हुकमारान?